तंग हो गए कपडे तो, लाज कहां से होए !अनाज होगए हाईब्रीड के तो, स्वाद कहां से होए !!नेता हो गए कुर्सी के तो देश का उद्दार कहां से होए !फूल हो गए प्लास्टिक के तो सुगंध कहां से होए !!चेहरा हो गया मेकअप के तो रूप कहां से होए !सम्बंध हो गए पैसो के तो प्रेम कहां से होए !!शिक्षक हो गए ट्युशन के तो विद्दा कहां से होए !भोजन हो गए डालडा के तो ताकत कहां से होए !!प्रोग्राम हो गए केबल के तो संस्कार कहां से होए !भक्त हो गए स्वार्थी तो भगवान कहां से होए !!आदमीं हो गया बुरी आदत का तो होश कहां से होए !अभिनेता नेता बन गए तो देश का उद्दार कहां से होए !!जनता आंख मूंद कर वोट दे तो अच्छी सरकार कहां से होए !जहां भ्रष्टाचार का बोलबाला हो तो स्वच्छ लोकतंत्र कहां से होए !!
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